Wednesday, 19 April 2017

Exploitation of Male


Exploitation of Male

पुरुष का शोषण

आजकल के चलन में पुरुष तीन तरह की ज़िंदगी जीते है :

सुसंगत विवाह जिंदगी

प्रेम विवाह जिंदगी

लिव-इन जिंदगी

सुसंगत विवाह का मतलब है की पुरुष अपने परिवार के फैसले से सहमत हैवह आंखे बंद करके महिला की हर चीज़ पर विश्वास कर लेता हैजैसे कि उसकी पढ़ाई-लिखाईनौकरीचालचलन, पारिवारिक पृष्ठभूमि आदि ।

प्रेम विवाह का मतलब है की पुरुष अपने फैसले से सहमत हैवह आंखे बंद करके महिला की हर चीज़ पर विश्वास करलेता हैवह कभी भी उसकी पढ़ाई-लिखाईनौकरी,चालचलनपारिवारिक पृष्ठभूमि आदि के बारे में नहीं पूछताजो वो कहती है, जो चाहती है, वो उसे पूरा करता है,अगर परिवार मानता है, तो सुसंगत विवाह होता है वरना अदालती विवाह या आर्य समाज मंदिर में विवाह होता है ।

लिव-इन का मतलब है की पुरुष बिना विवाह के महिला के साथ रहता हैदोनों इस बात पर सहमत होते है कि विवाह करेंगे या नहीं करेंगेवह आंखे बंद करके उसकी हर चीज़ पर विश्वास कर लेता हैजैसे की उसकी पढ़ाई-लिखाई,नौकरीचालचलनपारिवारिक पृष्ठभूमिआदि ।

रिश्ते के दौरान पुरुष के द्वारा सामना की गई कुछ सामान्य समस्या:

महिला : मैं तुम्हारे परिवार के साथ रहना नहीं चाहतीमुझे तुम्हारा वेतन मेरे हाथ में चाहिएमैं तुम्हारे परिवार का कोई काम नहीं करूंगी, आदि ।

कभी कभार पुरुष सहमत हो जाता है ताकि गृह कलेष न हो ।

परिणाम: घर का सारा काम पुरुष और उसके परिवार को करना पड़ता हैमहिला अपने दोस्तो ओर परिवार के साथ मोबाइल पर व्यस्त रहती हैसारा दिन टीवी देखती रहती है,दोस्तो के साथ देर रात तक बाहर रहना, खाना-पीना,घूमनाआदि उसकी आदते बन जाती हैऔर आखिर में बिना संभोग के सो जाती हैऔर हद तो तब होती है जब वो अपनी मर्जी से उसका शारीरिक शोषण (बलात्कार) यानि की पुरुष की मर्जी के बिना संभोग करती है ओर कहती है ये तो प्यार है और पुरुष करता है तो वह वैवाहिक बलात्कार बन जाता है ।

कभी कभार पुरुष सहमत नहीं होता है:

परिणाम: महिला का ताना मारना शुरू हो जाता हैजैसे कि हमेशा अपने परिवार में घुसे रहते होमै कुछ नहीं तुम्हारे लिएलगता है तुम्हें सबक सिखाना पड़ेगातुम ऐसे नहीं मानोगेऔर फिर शुरू होता है उसका असली नाटक, खाना न बनानाकपड़े न धोनाजल्दी सो जानासंभोग के लिए मना करनागर्भवती न होना ओर अगर हो जाए तो गर्भपात कर लेनापुरुष का शारीरिक शोषण (बलात्कार) यानि की पुरुष की मर्जी के बिना संभोग करती है और कहती है ये तो प्यार है ओर पुरुष करता है तो वह वैवाहिक बलात्कार बन जाता है । और आखिर में अपने घर पर जा कर बैठ जाती है ।

पुरुष की हालत:

सुबह टेंशन में उठता हैनाश्ता होता नहींलंच मिलता नहीं,सारा दिन टेंशन में रहता हैसीनियर से डांट खाता हैफिर भी काम करता हैसब कुछ सहता हैक्योंकि घर पर जो बीवी बैठी है उसे पालना हैउसकी जरूरते पूरी करनी है,उसको शॉपिंग करानी हैउसको ज़ेवर दिलवाने हैउसको होटल में खाना खिलाना हैउसको घुमाना हैआदि। रात को देर से घर पहुंचता है ओर देखता है बीवी सो चुकी है,डिनर बना नहीं होतातब वह सिगरेट ओर शराब में गिरता चला जाता हैओर हद तो तब होती है जब वो अपनी मर्जी से पुरुष का शारीरिक शोषण (बलात्कार) यानि की पुरुष की मर्जी के बिना संभोग करती है ओर कहती है ये तो प्यार है ओर पुरुष करता है तो वह वैवाहिक बलात्कार बन जाता है ।

अब शुरू होता है असली नाटक

महिला (रोते रोते) अपने घर फोन करती है :

मम्मी में बहुत परेशान हूँवो मेरी नहीं सुनताहमेशा अपने परिवार में घुसा रहता हैसुबह बिना कुछ बोले घर से निकल जाता हैनाश्ता नहीं करतालंच भी लेकर नहीं जातारात को देर से आता हैडिनर भी नहीं करताधूम्रपान और शराब भी पीने लगा हैवेतन नहीं देताएक एक पैसे केलिए तरस गयी हूँयहाँ मेरा कोई नहीं हैसब मुझे परेशान करते हैमुझे यहाँ से ले जाओवरना में मर जाऊँगी आदि ।

महिला के परिवार सलाह: घर का काम करना छोड़ दे,खाना बनाना छोड़ दे, कपड़े धोना छोड़ देअपना खाना बना लिया कर या बाहर खा लिया करऔर किसी की भी मत सुनिओबाकी हम देख लेंगे ।

यहाँ से महिला का खतरनाक बर्ताव शुरू होता है ओर शुरू होता है लड़के का असली शोषण

महिला : रात को 12 बजे मुझे ये बताओ तुम क्या चाहते हो,आजकल किस से तुम्हारा चक्कर चल रहा हैतुम्हारा वेतन कितना हैतुम्हारा वेतन जा कहाँ रहा हैमेरा तो कोई खर्चा नहीं हैध्यान से सुन लो या तो मुझे चुन लो या अपने परिवार कोसमझ लो आज से मैं तुम्हारे लिए मर गयी।

पुरुष का परिवार: तु तो उसका ग़ुलाम हैहम तेरे लिए कुछ नहींमैने (माँ) तुझे जनम दिया है और तु मुझे ही सिखा रहा हैजा आज से मैं तेरे लिए मर गयी। अपनी पूरी सहन शक्ति ओर प्यार से ओर डर से वो सारे काम करता जाता है ओर साथ ही एक मुजरिम की जिंदगी जीने लगता हैजैसे कि उसने जनम ले कर कोई गलती की होउसकी कोई नहीं सुनता, न तो महिला और उसका परिवार ओर न ही उसका खुद का परिवार ।

एक दिन लड़की घर से निकाल जाती है

सुसंगत विवाह में

पुरुष अपने परिवार से: देख लिया अपनी पसंद की महिला लाने का नतीजामुझे पसंद नहीं थीफिर भी मैंने तुम लोगो का मन रखा ओर अब देखो समाज हमारा मज़ाक बना रहा है ।

पुरुष का परिवार : तुझे उसको बस में करना नहीं आयातुने ही उसको सर पर चढ़ा रखा थातेरे अंदर ही कोई कमी है ।

प्रेम विवाह में :

पुरुष का परिवार : देख लिया अपनी पसंद की लड़की लाने का नतीजाहमे पसंद नहीं थीफिर भी हमने तेरे खातिर हाँ की ओर अब देखो समाज हमारा मज़ाक बना रहा है।

लिव-इन में

महिला पुरुष से : अब हम साथ नहीं रह सकतेतुम मेरेप्रकार के नहीं होअब मुझे मेरे प्रकार का मिल गया हैऔर वो मेरा वरिष्ठ भी है और अब हम लोग शादी करने जा रहे है।

अब शुरू होता है कानूनी और मानसिक तनाव

सुसंगत विवाह में

पुरुष : नाश्ता लंच डिनर का पता नहींसिर्फ दफ्तर और दफ्तरधूम्रपान करने लगता है, शराब पीने लगता हैकभी कभी मरने की भी सोचता है। एक दिन अचानक उसके घर पर कानुनी नोटिस आता हैउसको पढ़ने पर पता लगता है की पूरे परिवार के खिलाफ शिकायत की गयी हैजाने पर पता लगता है की पूरे परिवार ने दहेज के लिए मारा-पीटा,ससुर जेठ देवर नंदोई ने छेड़खानी की ओर बलात्कार करने की कोशिश भी कीलड़के ने बिना मर्जी के संभोग भी कियाओर अप्रकार्तिक संभोग भी कियाअब लड़के का असली शोषण शुरू होता हैऔर शुरू होता है पैसे का खेलजांच अधिकारी पैसा मांगता हैडराता हैझूठ बोलता हैलड़की पैसे मांगती है वापिस आने के लिए या रिश्ता खत्म करने के लिएअगर लड़का मानता है तो उसकीमेहनत की कमाई जाती है अगर नहीं मानता तो उसका मानसिक शोषण शुरू होता हैपहले पुलिस चक्कर कटवाती है फिर वकील चक्कर कटवाता हैखाना पीना सब बर्बाद हो जाता हैनौकरी चली जाती हैकमजोर लड़के बिखर जाते हैहर जगह तिरस्कार होता है। मजबूर और कमजोर पुरुष महिला को चुनते है ओर जिंदगी भर उसकी सोच पर चलते है। असली लड़के कानुनी लड़ाई लड़ते है।

प्रेम विवाह और लिव-इन में:

नाश्ता लंच डिनर का पता नहींसिर्फ दफ्तर और दफ्तर,धूम्रपान करने लगता है और शराब पीने लगता हैकभी कभी मरने की भी सोचता है। एक दिन अचानक उसके घर पर पुलिसवकील या कोर्ट नोटिस आता हैउसको पढ़ने पर पता लगता है की उसके उपर बलात्कार और अप्रकार्तिक संभोग का जुर्म लगा हैअब लड़के का असली शोषण शुरू होता हैओर शुरू होता है पैसे का खेलजांच अधिकारी पैसा मांगता हैडराता हैझूठ बोलता हैमहिला पैसे मांगती है केस वापिस लेने लिएअगर पुरुष मानता हैतो उसकी मेहनत की कमाई जाती है अगर नहीं मानता तो उसका मानसिक शोषण शुरू होता हैपहले पुलिस चक्कर कटवाती है फिर वकील चक्कर कटवाता हैखाना पीनासब बर्बाद हो जाता हैनौकरी चली जाती हैकमजोर लड़के बिखर जाते है कुछ जान से जाते है कुछ समाज से,हर जगह तिरस्कार होता है। इन सबके बीच पुरुष बहुत कुछ झेलता है, अपने परिवार सेदोस्तो सेरिश्तेदारों सेदफ्तर से आदि।

पुरुष का परिवार : सब तेरे कारण हुआ ।

रिश्तेदार: इन लोगो की सोच अच्छी नहीं है ।

दोस्त: नपुंसक है ।

समाज : औरत पर जुल्म करने वाला ।

अब लड़का सोचता है इससे अच्छा तो में पैदा ही नहीं होता ।

कोई खुशियों की चाह में रोयाकोई दुखों की पनाह में रोया..

अजीब सिलसिला हैं ये ज़िंदगी का..

कोई भरोसे के लिए रोया..कोई भरोसा कर के रोया..

मजबूर और कमजोर लड़के पैसा दे कर केस सैटल कर लेते हैफिर नया रिश्ता बनाते है ओर फिर वही साइकल शुरू हो जाती है । असली लड़के कानूनी लड़ाई लड़ते है । अचानक एक दिन उसे पता चलता है की एक एनजीओ जिसका नाम सिर्फ है उसके जैसे पुरुषो की मदद करती हैमिलने पर उसे पता चलता है की कानूनी लड़ाई आसान नहीं है लेकिन मुश्किल भी नहीं हैओर फिर वो तैयार होता है कानूनी लड़ाई के लिए।

उपर लिखित कहानी काल्पनिक है ओर किसी व्यक्ति विशेष पर (न तो किसी पुरुष परऔर न ही किसी महिला पर) लागू नहीं होती है और हो भी सकती है और न ही मेरा मकसद किसी की भावनाओ को नुकसान करना है। मेरा मकसद सिर्फ और सिर्फ लोगो को समझाना है की किसी भी वयक्ति को इतना भी परेशान मत करो की उसका घरपरिवार,कानुनभगवानसमाजरिश्तेनातेपर से विशवास ही खत्म हो जाए। ये एक काल्पनिक कहानी है जिसमे एक पुरुष सब कुछ सहता है ओर दूसरी तरफ एक महिला है जिसका अहंकार खत्म नहीं होता । उस महिला को ये समझ नहीं आ रहा और न ही वो जानना चाहती है की जिस चीज़ को प्यार से पा सकती है वो कभी भी उसको जबर्दस्ती नहीं मिल सकती।

इसलिए तो कहता हूँ:

ज़िन्दगी हसीन है ज़िन्दगी से प्यार करो ….., हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो …..

वो पल भी आएगाजिस पल का इंतज़ार हैं आपको….

बस रब पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो 


Additions and deletions are most welcome
Sorry to say Please
Sattu Jatav
9953935838

Tuesday, 18 April 2017

Domestic Violence on Husband and Men


Domestic Violence on Husband and Men

पति या पुरुष पर घरेलू हिंसा

प्रस्तावना
अक्सर हम हमेशा से सुनते आये हैं कि घरेलु हिंसा सिर्फ महिला ही सहती है लेकिन क्या कभी हमने सुना है की एक पुरुष भी घरेलु हिंसा का शिकार होता है । ये कहना सच है पुरुष महिला के मुक़ाबले शारीरिक रूप से मजबूत होता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं की वो घरेलु हिंसा न सहता हो । और ये वो हिंसा होती है जिसे चाहकर भी कोई पुरुष किसी को बता नहीं सकता या बताना नहीं चाहता । क्योंकि समाज मानने को तैयार नहीं और कानून का भी इस मामले में कोई सहारा नहीं है । आज के दौर में अगर एक महिला चाहे तो अपने पति या पुरुष  को घरेलू हिंसा कानून के सहारे जेल भिजवा सकती है । लेकिन ये हक़ किसी पति या पुरुष को नहीं है ।

घरेलू हिंसा झेलने वाले पुरुष
इस श्रेणी में सबसे पहला स्थान पति का होता है उसके बाद ससुर फिर जेठ फिर देवर और फिर कोई भी पुरुष जो की पति से ताल्लुक रखता है । जरूरी नहीं की पुरुष शादी शुदा हो अगर वो लिव इन में रह रहा है तो भी वो किसी न किसी रूप से घरेलू हिंसा का शिकार होता है ।

समाज क्या कहता है
समाज ये मानने को तैयार नहीं की पति या पुरुष भी कभी घरेलू हिंसा का शिकार हो सकता है । अगर कभी कोई पति या पुरुष ये बताने की कोशिश भी करेगा तो उसका मज़ाक उड़ाया जाएगा और उस पर व्यंग मारा जाएगा की एक औरत से पिट गया । थू है तेरी मर्दानगी पर । इसी कारण पति या पुरुष अपने हुए अत्याचार को किसी से कहता नहीं ओर अंदर ही अंदर घुलता रहता है और धीरे धीरे बीमारी का घर बनता चला जाता है । और आखिर में एक दिन उसकी ज़िंदगी भी समाप्त हो जाती है ।  समाज में माना जाता है कि एक पति या पुरुष कभी भी महिला के जुल्मों का शिकार नहीं हो सकता है. उसे कई वैधानिक, सामाजिक कानूनों या आर्थिक मदद से सिर्फ इसलिए वंचित किया जाता है क्योंकि वह पुरुष है. आजकल तो समाचार पत्र, टीवी, सिनेमा आदि औरत को बहुत ताकतवर दिखाया जा रहा है. घर ही नहीं, कार्यक्षेत्र में भी उस का दबदबा होता है.

घरेलु हिंसा के प्रकार
कोई भी महिला खासतोर से पत्नी अपने पति या पुरुष  का काफी तरीको से घरेलु उत्पीड़न करती है । जैसे कि मानसिक पीड़ा देना, पारिवारिक सदस्य से न मिलने देना, दोस्त और रिश्तेदार ओर आस पड़ोस से न मिलने देना, आत्‍महत्‍या करने की धमकी देना, नामर्द पुकारना, घर से निकलने को विवश करना, बात बात पर टोकना,  थप्‍पड़ मारना, शारिरिक हिंसा, मारपीट करना, ठोकर मारना, दांत से काटना, लात मारना, मुक्‍का मारना, धकेलना, किसी अन्‍य रीति से शारीरिक पीड़ा या क्षति पहुँचाना, दुर्व्‍यवहार करने, अपमानित करने, नीचा दिखाने, प्रतिष्‍ठा का उल्‍लंघन, मौखिक और भावनान्‍तम हिंसा, अपमान, गालियॉं देना, चरित्र और आचरण पर दोषारोपण, पूरी सैलरी रख लेना, संभोग न करना, खाने में थूक देना, पति या पुरुष  कि बिना मर्जी से संभोग करना, महिला का बात बात पर आत्महत्या की धमकी देना, बेइज्‍जत करना, ताने देना, गाली-गलौच करना, झूठा आरोप लगाना, मूलभूत आवश्‍यकताओं को पूरा न करना, मायके से न बुलाना,, शारीरिक प्रताड़ना, तलाक एवं मूलभूत आवश्‍यकताओं को पूरा न करने की धमकी देना, चांटा मारना, धक्‍का देना, छीना झपटी करना,   लकड़ी या हल्‍की वस्‍तु से पीटना, लात मारना, घूंसा मारना, माचिस या सिगरेट से जलाना, गंभीर रूप से पीटना, जिससे हड़डी टूटना या खिसकना जैसी घटनाएं शामिल है, गंभीर रूप से जलाना, लोहे की छड़, धारदार वस्‍तु या भारी वस्‍तु से वार करना। कभी कभी पति या पुरुष ये सब सह नहीं पता और आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाता है ।

घरेलू हिंसा के कारण
अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ज्यादा सुन्दर है मतलब की अगर पति या पुरुष  काला है तो उसको रंग भेद की टिप्पणी सहनी पड़ती है । अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ज्यादा पढी लिखी है मतलब की पति या पुरुष अगर कम पढ़ा लिखा है तो उसको अनपढ़ और गंवार आदि की टिप्पणी सहनी पड़ती है । अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ज्यादा कमाती है तो उसको कम कमाने का ताना झेलना पड़ता है । अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ऊंचे पद पर कार्य करती है तो उसको इस बात का भी ताना झेलना पड़ता है । कभी कभी महिला पति या पुरुष  के परिवार के साथ रहना नहीं चाहती और पति या पुरुष अपने परिवार को छोड़ना नहीं चाहता ये भी एक कारण होता है । कभी कभी महिला पति या पुरुष  पर मालिकाना हक़ चाहती है और पति या पुरुष  पर सम्पूर्ण अधिकार चाहती है । किसी किसी परिवार में महिला के मायके का दखल भी घरेलू हिंसा को बड़ावा देता है । किसी किसी महिला के शादी से पहले के अतिरिक्त विवाहेतर संबंध शादी के बाद भी चल रहे होते है या दफ्तर में किसी साथी के साथ प्रेम प्रसंग भी घरेलू हिंसा को बड़ावा देता है । महिला का बहुत ज्यादा शक्की होना । महिला का बहुत ज्यादा ज़िद्दी होना । महिला का बहुत ज्यादा खर्चीला होना । महिला की पेसो की भूख समाप्त न होना । महिला का बात बात पर झूठ बोलना ।

कानुन क्या कहता है ।
कानून  के अनुसार घरेलू हिंसा सिर्फ एक महिला पर हो सकती है । किसी पति या पुरुष  पर नहीं । हालांकि एक नाबालिग पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार हो सकता है लेकिन अगर वो नाबालिग होते हुए शादी शुदा है तो वो कभी भी घरेलु हिंसा का शिकार नहीं हो सकता । पशुओं तक को हमारे समाज में सुरक्षा मिलती है लेकिन पति या पुरुष की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है. हक़ीक़त तो यह भी है कि जब हम पति या पुरुष पर अत्याचार के खिलाफ धरने या प्रदर्शन आदि करते हैं तो बहुत सारे पति या पुरुष उस में शामिल नहीं होते हैं । या तो शर्म महसूस करते हैं या अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के विरोध में आवाज उठाने से कतराते हैं कि समाज क्या कहेगा । पुरुषों पर होने वाले अत्याचार तब तक नहीं रोके जा सकते जब तक वे खुद अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाते । लेकिन ये सोच धीरे धीरे बादल रही है और अब लोग खुलकर पति या पुरुष पर घरेलु हिंसा के उपर बोल रहे है लिख रहे है ।

घरेलू हिंसा का नुकसान
सुबह मानसिक तनाव में उठता है, नाश्ता होता नहीं, लंच मिलता नहीं, सारा दिन मानसिक तनाव में रहता है, दफ्तर में अधिकारियों से डांट खाता है, फिर भी काम करता है, सब कुछ सहता है, रात को देर से घर पहुंचता है ओर देखता है बीवी सो चुकी है, डिनर बना नहीं होता, तब वह सिगरेट ओर शराब में गिरता चला जाता है, ओर हद तो तब होती है जब वो अपनी मर्जी से लड़के का शारीरिक शोषण (बलात्कार) यानि की लड़के की मर्जी के बिना संभोग करती है ओर कहती है ये तो तुझे करना पड़ेगा आये दिन न जाने कितने पति या पुरुष अपने ऊपर होने वाले शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति सहते हुए या तो जीने को मजबूर है या मौत को गले लगा लेते हैं   

पति या पुरुष क्या कर सकता है
पति या पुरुष अपने उपर हुए हिंसा के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज़ करा सकते है । अगर पुलिस उनकी शिकायत  दर्ज नहीं करती, तो पति या पुरुष सीधे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है।
निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अब इस बात को महसूस कर रहे हैं कि महिलाएं भी पति या पुरुष के उपर घरेलू हिंसा के झूठे मुकदमे कर रही हैं। इसी का परिणाम है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अदालतों ने झूठी शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए ऐसी महिलाओं को सजा दी है।


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