Thursday, 19 May 2016

Male exploitation


Exploitation of Male

पुरुष का शोषण

आजकल के चलन में पुरुष तीन तरह की ज़िंदगी जीते है :

सुसंगत विवाह जिंदगी

प्रेम विवाह जिंदगी

लिव-इन जिंदगी

सुसंगत विवाह का मतलब है की पुरुष अपने परिवार के फैसले से सहमत है, वह आंखे बंद करके महिला की हर चीज़ पर विश्वास कर लेता है, जैसे कि उसकी पढ़ाई-लिखाई, नौकरी, चालचलन, पारिवारिक पृष्ठभूमि आदि ।

प्रेम विवाह का मतलब है की पुरुष अपने फैसले से सहमत है, वह आंखे बंद करके महिला की हर चीज़ पर विश्वास कर लेता है, वह कभी भी उसकी पढ़ाई-लिखाई, नौकरी, चालचलन, पारिवारिक पृष्ठभूमि आदि के बारे में नहीं पूछता, जो वो कहती है, जो चाहती है, वो उसे पूरा करता है, अगर परिवार मानता है, तो सुसंगत विवाह होता है वरना अदालती विवाह या आर्य समाज मंदिर में विवाह होता है ।

लिव-इन का मतलब है की पुरुष बिना विवाह के महिला के साथ रहता है, दोनों इस बात पर सहमत होते है कि विवाह करेंगे या नहीं करेंगे, वह आंखे बंद करके उसकी हर चीज़ पर विश्वास कर लेता है, जैसे की उसकी पढ़ाई-लिखाई, नौकरी, चालचलन, पारिवारिक पृष्ठभूमि, आदि ।

रिश्ते के दौरान पुरुष के द्वारा सामना की गई कुछ सामान्य समस्या:

महिला : मैं तुम्हारे परिवार के साथ रहना नहीं चाहती, मुझे तुम्हारा वेतन मेरे हाथ में चाहिए, मैं तुम्हारे परिवार का कोई काम नहीं करूंगी, आदि ।

कभी कभार पुरुष सहमत हो जाता है ताकि गृह कलेष न हो ।

परिणाम: घर का सारा काम पुरुष और उसके परिवार को करना पड़ता है, महिला अपने दोस्तो ओर परिवार के साथ मोबाइल पर व्यस्त रहती है, सारा दिन टीवी देखती रहती है, दोस्तो के साथ देर रात तक बाहर रहना, खाना-पीना, घूमना, आदि उसकी आदते बन जाती है, और आखिर में बिना संभोग के सो जाती है, और हद तो तब होती है जब वो अपनी मर्जी से उसका शारीरिक शोषण (बलात्कार) यानि की पुरुष की मर्जी के बिना संभोग करती है ओर कहती है ये तो प्यार है और पुरुष करता है तो वह वैवाहिक बलात्कार बन जाता है ।

कभी कभार पुरुष सहमत नहीं होता है:

परिणाम: महिला का ताना मारना शुरू हो जाता है, जैसे कि हमेशा अपने परिवार में घुसे रहते हो, मै कुछ नहीं तुम्हारे लिए, लगता है तुम्हें सबक सिखाना पड़ेगा, तुम ऐसे नहीं मानोगे, और फिर शुरू होता है उसका असली नाटक, खाना न बनाना, कपड़े न धोना, जल्दी सो जाना, संभोग के लिए मना करना, गर्भवती न होना ओर अगर हो जाए तो गर्भपात कर लेना, पुरुष का शारीरिक शोषण (बलात्कार) यानि की पुरुष की मर्जी के बिना संभोग करती है और कहती है ये तो प्यार है ओर पुरुष करता है तो वह वैवाहिक बलात्कार बन जाता है । और आखिर में अपने घर पर जा कर बैठ जाती है ।

पुरुष की हालत:

सुबह टेंशन में उठता है, नाश्ता होता नहीं, लंच मिलता नहीं, सारा दिन टेंशन में रहता है, सीनियर से डांट खाता है, फिर भी काम करता है, सब कुछ सहता है, क्योंकि घर पर जो बीवी बैठी है उसे पालना है, उसकी जरूरते पूरी करनी है, उसको शॉपिंग करानी है, उसको ज़ेवर दिलवाने है, उसको होटल में खाना खिलाना है, उसको घुमाना है, आदि। रात को देर से घर पहुंचता है ओर देखता है बीवी सो चुकी है, डिनर बना नहीं होता, तब वह सिगरेट ओर शराब में गिरता चला जाता है, ओर हद तो तब होती है जब वो अपनी मर्जी से पुरुष का शारीरिक शोषण (बलात्कार) यानि की पुरुष की मर्जी के बिना संभोग करती है ओर कहती है ये तो प्यार है ओर पुरुष करता है तो वह वैवाहिक बलात्कार बन जाता है ।

अब शुरू होता है असली नाटक

महिला (रोते रोते) अपने घर फोन करती है :

मम्मी में बहुत परेशान हूँ, वो मेरी नहीं सुनता, हमेशा अपने परिवार में घुसा रहता है, सुबह बिना कुछ बोले घर से निकल जाता है, नाश्ता नहीं करता, लंच भी लेकर नहीं जाता, रात को देर से आता है, डिनर भी नहीं करता, धूम्रपान और शराब भी पीने लगा है, वेतन नहीं देता, एक एक पैसे के लिए तरस गयी हूँ, यहाँ मेरा कोई नहीं है, सब मुझे परेशान करते है, मुझे यहाँ से ले जाओ, वरना में मर जाऊँगी आदि ।

महिला के परिवार सलाह: घर का काम करना छोड़ दे, खाना बनाना छोड़ दे, कपड़े धोना छोड़ दे, अपना खाना बना लिया कर या बाहर खा लिया कर, और किसी की भी मत सुनिओ, बाकी हम देख लेंगे ।

यहाँ से महिला का खतरनाक बर्ताव शुरू होता है ओर शुरू होता है लड़के का असली शोषण

महिला : रात को 12 बजे मुझे ये बताओ तुम क्या चाहते हो, आजकल किस से तुम्हारा चक्कर चल रहा है, तुम्हारा वेतन कितना है, तुम्हारा वेतन जा कहाँ रहा है, मेरा तो कोई खर्चा नहीं है, ध्यान से सुन लो या तो मुझे चुन लो या अपने परिवार को, समझ लो आज से मैं तुम्हारे लिए मर गयी।

पुरुष का परिवार: तु तो उसका ग़ुलाम है, हम तेरे लिए कुछ नहीं, मैने (माँ) तुझे जनम दिया है और तु मुझे ही सिखा रहा है, जा आज से मैं तेरे लिए मर गयी। अपनी पूरी सहन शक्ति ओर प्यार से ओर डर से वो सारे काम करता जाता है ओर साथ ही एक मुजरिम की जिंदगी जीने लगता है, जैसे कि उसने जनम ले कर कोई गलती की हो, उसकी कोई नहीं सुनता, न तो महिला और उसका परिवार ओर न ही उसका खुद का परिवार ।

एक दिन लड़की घर से निकाल जाती है

सुसंगत विवाह में

पुरुष अपने परिवार से: देख लिया अपनी पसंद की महिला लाने का नतीजा, मुझे पसंद नहीं थी, फिर भी मैंने तुम लोगो का मन रखा ओर अब देखो समाज हमारा मज़ाक बना रहा है ।

पुरुष का परिवार : तुझे उसको बस में करना नहीं आया, तुने ही उसको सर पर चढ़ा रखा था, तेरे अंदर ही कोई कमी है ।

प्रेम विवाह में :

पुरुष का परिवार : देख लिया अपनी पसंद की लड़की लाने का नतीजा, हमे पसंद नहीं थी, फिर भी हमने तेरे खातिर हाँ की ओर अब देखो समाज हमारा मज़ाक बना रहा है।

लिव-इन में

महिला पुरुष से : अब हम साथ नहीं रह सकते, तुम मेरे प्रकार के नहीं हो, अब मुझे मेरे प्रकार का मिल गया है, और वो मेरा वरिष्ठ भी है और अब हम लोग शादी करने जा रहे है।

अब शुरू होता है कानूनी और मानसिक तनाव

सुसंगत विवाह में

पुरुष : नाश्ता लंच डिनर का पता नहीं, सिर्फ दफ्तर और दफ्तर, धूम्रपान करने लगता है, शराब पीने लगता है, कभी कभी मरने की भी सोचता है। एक दिन अचानक उसके घर पर कानुनी नोटिस आता है, उसको पढ़ने पर पता लगता है की पूरे परिवार के खिलाफ शिकायत की गयी है, जाने पर पता लगता है की पूरे परिवार ने दहेज के लिए मारा-पीटा, ससुर जेठ देवर नंदोई ने छेड़खानी की ओर बलात्कार करने की कोशिश भी की, लड़के ने बिना मर्जी के संभोग भी किया, ओर अप्रकार्तिक संभोग भी किया, अब लड़के का असली शोषण शुरू होता है, और शुरू होता है पैसे का खेल, जांच अधिकारी पैसा मांगता है, डराता है, झूठ बोलता है, लड़की पैसे मांगती है वापिस आने के लिए या रिश्ता खत्म करने के लिए, अगर लड़का मानता है तो उसकी मेहनत की कमाई जाती है अगर नहीं मानता तो उसका मानसिक शोषण शुरू होता है, पहले पुलिस चक्कर कटवाती है फिर वकील चक्कर कटवाता है, खाना पीना सब बर्बाद हो जाता है, नौकरी चली जाती है, कमजोर लड़के बिखर जाते है, हर जगह तिरस्कार होता है। मजबूर और कमजोर पुरुष महिला को चुनते है ओर जिंदगी भर उसकी सोच पर चलते है। असली लड़के कानुनी लड़ाई लड़ते है।

प्रेम विवाह और लिव-इन में:

नाश्ता लंच डिनर का पता नहीं, सिर्फ दफ्तर और दफ्तर, धूम्रपान करने लगता है और शराब पीने लगता है, कभी कभी मरने की भी सोचता है। एक दिन अचानक उसके घर पर पुलिस, वकील या कोर्ट नोटिस आता है, उसको पढ़ने पर पता लगता है की उसके उपर बलात्कार और अप्रकार्तिक संभोग का जुर्म लगा है, अब लड़के का असली शोषण शुरू होता है, ओर शुरू होता है पैसे का खेल, जांच अधिकारी पैसा मांगता है, डराता है, झूठ बोलता है, महिला पैसे मांगती है केस वापिस लेने लिए, अगर पुरुष मानता है तो उसकी मेहनत की कमाई जाती है अगर नहीं मानता तो उसका मानसिक शोषण शुरू होता है, पहले पुलिस चक्कर कटवाती है फिर वकील चक्कर कटवाता है, खाना पीना सब बर्बाद हो जाता है, नौकरी चली जाती है, कमजोर लड़के बिखर जाते है कुछ जान से जाते है कुछ समाज से, हर जगह तिरस्कार होता है। इन सबके बीच पुरुष बहुत कुछ झेलता है, अपने परिवार से, दोस्तो से, रिश्तेदारों से, दफ्तर से आदि।

पुरुष का परिवार : सब तेरे कारण हुआ ।

रिश्तेदार: इन लोगो की सोच अच्छी नहीं है ।

दोस्त: नपुंसक है ।

समाज : औरत पर जुल्म करने वाला ।

अब लड़का सोचता है इससे अच्छा तो में पैदा ही नहीं होता ।

कोई खुशियों की चाह में रोया, कोई दुखों की पनाह में रोया..

अजीब सिलसिला हैं ये ज़िंदगी का..

कोई भरोसे के लिए रोया.., कोई भरोसा कर के रोया..

मजबूर और कमजोर लड़के पैसा दे कर केस सैटल कर लेते है, फिर नया रिश्ता बनाते है ओर फिर वही साइकल शुरू हो जाती है । असली लड़के कानूनी लड़ाई लड़ते है । अचानक एक दिन उसे पता चलता है की एक एनजीओ जिसका नाम सिर्फ है उसके जैसे पुरुषो की मदद करती है, मिलने पर उसे पता चलता है की कानूनी लड़ाई आसान नहीं है लेकिन मुश्किल भी नहीं है, ओर फिर वो तैयार होता है कानूनी लड़ाई के लिए।

उपर लिखित कहानी काल्पनिक है ओर किसी व्यक्ति विशेष पर (न तो किसी पुरुष परऔर न ही किसी महिला पर) लागू नहीं होती है और हो भी सकती है और न ही मेरा मकसद किसी की भावनाओ को नुकसान करना है। मेरा मकसद सिर्फ और सिर्फ लोगो को समझाना है की किसी भी वयक्ति को इतना भी परेशान मत करो की उसका घर, परिवार, कानुन, भगवान, समाज, रिश्ते, नाते, पर से विशवास ही खत्म हो जाए। ये एक काल्पनिक कहानी है जिसमे एक पुरुष सब कुछ सहता है ओर दूसरी तरफ एक महिला है जिसका अहंकार खत्म नहीं होता । उस महिला को ये समझ नहीं आ रहा और न ही वो जानना चाहती है की जिस चीज़ को प्यार से पा सकती है वो कभी भी उसको जबर्दस्ती नहीं मिल सकती।

इसलिए तो कहता हूँ:

ज़िन्दगी हसीन है , ज़िन्दगी से प्यार करो ….., हो रात तो सुबह का इंतज़ार करो …..

वो पल भी आएगा, जिस पल का इंतज़ार हैं आपको….

बस रब पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार करो


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Sattu Jatav
9953935838