Thursday, 21 April 2016

Rape of Childhood

मासूम नाबालिग लड़को का उत्पीड़न

अभी कुछ दिनो पहले एक खबर आई थी की एक 38 साल की महिला शिक्षक कोयौन शोषण / बलात्कार के लिए गिरफ्तार किया गया है । खबर के अनुसारउसने अपने बेटे के दोस्त के साथ तीन महिने तक यौन शोषण / बलात्कार किया ओर जब लड़के ने इसकी शिकायत की तो उस महिला के अनुसार वो दोनों पति पत्नी है । यानि की कानून की नजरों में एक महिला ने एक मासुम नाबालिग लड़के यौन शोषण / बलात्कार का किया ।

कितनी अजीब बात है की हमारे देश में यौन शोषण / बलात्कार सिर्फ लड़की का माना जाता है, मासुम नाबालिग लड़के का नहीं। यहाँ तक की हमारा कानुन भी यही मानता है कि यौन शोषण / बलात्कार सिर्फ लड़की का हो सकता है मासुम नाबालिग लड़के का नहीं । जबकि देखा जाए तो मासुम नाबालिग लड़को का भी यौन शोषण / बलात्कार होता है महिला द्वारा भी पुरुष द्वारा भी । आईपीसी 377 इस बात की व्याख्या करता है की मासुम नाबालिग लड़को का भी रेप होता है । और बच्चों का संरक्षण, लैंगिक अपराध अधिनियम 2012 (POSCO)कानून के अनुसार भी मासुम नाबालिग लड़के का भी यौन शोषण / बलात्कार तिरस्कार होता है । काफी बार मासुम नाबालिग लड़के के साथ यौन शोषण / बलात्कार की खबरे आती है लेकिन न तो सरकार ओर न ही मीडिया इस बात को तूल देती है । लेकिन अगर नाबालिग लड़की का यौन शोषण / बलात्कार हो जाए तो सरकार ओर मीडिया ओर तंत्र सब हिल जाता है उस लड़की को मेडिकल सहायता दी जाती है उसे मुआवजा दिया जाता है उसका चेहरा छुपा कर साक्षात्कार किया जाता है जबकि मासुम नाबालिग लड़के के मामले में ऐसा कुछ नहीं होता । इसका सबसे बड़ा कारण है की ज़्यादातर लोग सोचते है कि यौन शोषण / बलात्कार सिर्फ लड़की का ही हो सकता है । और हमे यही सोच तो बदलनी है ।

यूनिसेफ़ के अनुसार मासूम नाबालिग बच्चो के साथ हिंसा का निम्न प्रारूप हो सकता है: शारीरिक और मानसिक शोषण और चोट, उपेक्षा या लापरवाही उपचार, शोषण और यौन शोषण । हिंसा कही भी हो सकती है जैसे की घर, स्कूल, अनाथलयों, सड़कों, कार्यस्थल, जेल, हिरासत में लिए जाने के स्थानों में ।इस तरह की हिंसा उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं । चरम मामलों में हो सकती है।

भारत सरकार की रिपोर्ट Study on Child Abuse: India 2007” के अनुसार 52.94% मासुम नाबालिग लड़के यौन शोषण / बलात्कार किए गए जबकि 47.06% लड़कियों का यौन शोषण / बलात्कार हुआ जो कि पेज न: 49 ओर 74 पर दिया गया है । उसी रिपोर्ट के पेज न: 75 के अनुसार राज्यो का आंकड़ा दिया गया है जिसमे ज्यादातर राज्यो में मासुम नाबालिग लड़को का यौन शोषण / बलात्कार किया गया है ।

आजकल कुछ फिल्म निर्माता ओर टीवी वाले भी मासुम नाबालिग लड़को के उपर हुए अत्याचार को दिखा रहे है:
· पेज 3 2005 में दिखाया गया है कि विदेशी ग्राहक को खुश करने के लिए मासूम नाबालिग लड़को को यौन शोषण / बलात्कार के लिए परोसा जाता है ।
· बीए पास 2012 में दिखाया गया है कि कैसे बड़े ओर अमीर घर की महिला पुरुष का यौन शोषण / बलात्कार करती है ।
· स्लमडॉग मिलियनेयर 2008में दिखाया गया है कैसे मासुम नाबालिग लड़को को भिखारी बनाया जाता है ओर दलाल भी ।
· “अंधा युद्ध 1987 में दिखाया गया है कि कैसे एक शिक्षक एक मासुम नाबालिग छात्र का यौन शोषण / बलात्कार करता है ।

मासुम नाबालिग लड़को पर उत्पीड़न के प्रकार
· भिखारी बनाना ।
· मजदूर बनाना ।
· नौकर बनाना ।
· गुलाम बनाना ।
· यौन शोषण / बलात्कार करना ।
· कम उम्र में बड़ी उम्र कि लड़की से शादी ।
· ढाबो पर बर्तन धोते हुए
· भट्टो पर ईट बनते हुए

नकरात्मक लोग क्या सोचते है:
· कम उम्र का है बहस नहीं करेगा ।
· कम मजदूरी देनी पड़ेगी ।
· कितना मारो पीटो कही नहीं जाएगा ।
· पीटता रहेगा लेकिन कोई शिकायत नहीं करेगा ।
· मालकिन सोचती है की यौन शोषण / बलात्कार करूंगी तो किसी को बतायगा नहीं डर से चुप रहेगा या पैसो की ताकत से चुप रहेगा ।

उम्मीद कि किरण
आजकल कुछ सरकारी ओर गैर सरकारी संस्थाएं जैसे की एसआईएफ़ इस दिशा में काम कर रही है जिससे कि मासुम नाबालिग लड़को को भी न्याय मिल सके । वो भी सम्मान कि जिंदगी जी सके । अपना कैरियर बना सके । ओर जिस तरह एक लड़की को मासूमियत से देखा जाता है तो उसी तरह मासूमियत से एक नाबालिग लड़के को देखा जाए ।

समाचार पत्रो की खबरे
अमर उजाला की 8 अक्तूबर 2015 के अनुसार बागपत में एक शिक्षक ने कक्षा 2 के छात्र के साथ कुकर्म किया ।
अमर उजाला की 17 सितम्बर 2015 के अनुसार मुंबई में एक मदरसे में 5 साल के छात्र के साथ कुकर्म किया ।

इसको कैसे ढ़ीक किया जाए ओर क्या क्या जाए
सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सोचना होगा की ऐसा क्यों हो रहा है कैसे इसे रोका जाए। एक तरीका तो है की उत्पीड़न के बाद जिस तरह लड़की को देखा जाता है उसी तरह लड़के को भी देखा जाए। उसके साथ भी वही व्यवहार किया जाए तो लड़की के साथ किया जाता है। एनजीओ की मदद लेनी चाहिए । स्कूल ओर कॉलेज में इस विषय पर बातचीत होनी चाहिए । सरकार को लोगो के साथ मिलकर कदम उठने होंगे।

कुछ नज़र इधर भी