Friday, 15 April 2016

Why not file Hindu Marriage Act Section 9?

Why not  file Hindu Marriage Act Section 9?

धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम क्यों नहीं फ़ाइल करना चाहिए

काफी बार देखा जाता है कि जब भी कोई पति वैवाहिक समस्या में होता है तो वकील उसे हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत सेक्शन 9 फ़ाइल करने की सलाह देते है । लेकिन इस धारा का कोई भी वजूद नजर तो नहीं आता है । मेरे हिसाब से इसका इस्तेमाल पानी से आँख धोना है ।

इस संधर्भ में काफी लोगो की निमंलिखित राय है:

1. इस धारा के अंतर्गत केस फ़ाइल करने से जमानत मिल जाती है ।
2. इस केस को जीतने पर तलाक मिल जाता है ।
3. पत्नी को केस लड़ने के लिए पति के शहर आना पड़ता है ।
4. पत्नी का पैसा खर्च होता है ।
5. पत्नी का तलाक का केस बंद हो जाता है ।
6. पत्नी को कम मात्र में रखरखाव राशि देनी पड़ती है या उसका रखरखाव का केस खतम हो जाता है ।
7. पति कानून की नज़रों में ओर जज के सामने सही साबित हो जाता है ।
8. पत्नी को बुरा समझा जाता है ।

कुछ हकीकत जिसको नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता:

1. एक तरफ तो पति कहता है की मेरी पत्नी बहुत बुरी है दूसरी तरफ कहता है की मैं रखने की लिए तैयार हूँ । और यही बात पति के खिलाफ जाती है । बैल मेरिट्स पर मिलती है नाकी की सेक्शन 9 फ़ाइल करने पर । जज एक बार में समझ जाता है की सच क्या है ।
2. ये जरूरी नहीं की सेक्शन 9 कि डिक्री मिलने पर पति को तलाक मिल ही जाता है । लेकिन मिल भी सकता है । लेकिन अगर प्रतिवादी चाहे तो ये बहुत मुश्किल भी है । क्योंकि हमारी कानूनी प्रक्रिया काफी लचीली है जो की किसी भी केस लड्ने के लिए बहुत समय ओर मौका देती है ।
3. पत्नी चाहे तो उच्च न्यायलय या उच्चतम न्यायालय से केस को ट्रान्सफर करा सकती है । जरूरी नहीं की ऐसा हो जाए लेकिन हो भी सकता है ।
4. पत्नी का पैसा खर्च हो भी सकता है लेकिन वो सेक्शन 24 फ़ाइल कर देगी ।
5. पत्नी का तलाक का केस बंद नहीं होता है बल्कि दोनों केस साथ चलते है ।
6. कानून के हिसाब से अगर पत्नी चाहे तो बिना किसी कारण के अलग रह सकती है ओर इस स्थिति में खर्चा पानी मांग सकती है जरूरी नहीं की हिन्दू विवाह अधिनियम में मांगे बल्कि किसी ओर कानून के द्वारा भी मांग सकती है ।
7. जज पहली नज़र में सब कुछ समझ जाता है इसलिए ज्यादा चालू बनने की कोशिश न करे।
8. हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अनुसार जरूरी नहीं की कोर्ट पत्नी को गलत समझती है जज पति को भी गलत समझ सकता है ।

नुकसान:


1. पत्नी वापिस आने और साथ रहने के लिए हाँ कर सकती है ।
2. बेमतलब में एक केस बढ़ जाता है ।
3. पति विरोधाभासी बयान में फंस जाता है ।
4. अगर पति हार जाता है तो तलाक का केस मुश्किल हो जाता है ।
5. अगर पति केस जीत जाता है तो पत्नी स्थायी गुजारा भत्ता मांग सकती है ।


उपेर्लिखित का सार ये है की जितना हो सके हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 का इस्तेमाल करने से बच्चे।