Thursday, 21 April 2016

How to handle CAW Cell?



महिला सैल को कैसे संभाला जाए

1. जब भी महिला सेल से कोई फोन आए तो उनको बहुत ही निम्र स्वभाव से बोलो की महोदय पत्र भेज दीजिये ।
2. जब भी महिला सेल से कोई भी पत्र आए तो उपेक्षा मत करो ले लो ।
3. जब भी महिला सेल से कोई भी कर्मचारी खुद आ कर पत्र दे तो ले लेना चाहिए ।
4. महिलासेल पत्र सिर्फ एक प्रार्थना पत्र होता है ना की कोई सम्मन ।
5. कानूनी रूप से जरूरी नहीं की आप जाए या आप का कोई परिवार का सदस्यभी जाए ।
6. घबराने की कोई जरूरत नहीं आपको गिरफ्तार नहीं किया जाएगा ।
7. महिला सेल सिर्फ एक बातचीत करने की जगह है जहां पर कुछ सरकारी कर्मचारी आपकी पत्नी वाइफ़ की शिकायत पर आपको ओर आपके परिवार को बुलाते है ओर कोशिश करते है की समझोता हो जाए ।
8. समझोते से मतलब है की या तो आप पत्नी की बात मानो ओर उसके द्वारा लगाए गए झूटे आरोप मानो नहीं तो आपके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज़ की जाएगी ।
9. महिला सेल केवल महिलाओं के लिए है इसलिए आपकी बात वहाँ कोई नहीं सुनेगा ।
10.कोई भी प्रमाण न दे ।
11. शिकायत की नकल की मांग करे अगर मिल जाए तो ठीक नहीं तो सूचना के अधिकार के द्वारा मांग करे ।
12.किसी भी कोरे कागज पर हस्ताक्षर न करे ।
13.जब तक जरूरी न हो किसी को भी जाने की जरूरत नहीं ।
14.स्त्रीधन की लिस्ट को ले ले ओर देख ले की हर पेज पर लड़की ने हस्ताक्षर करा हो । लेकिन साथ ही वहाँ पर लिख दे की लिस्ट दहेज निषेध अधिनियम 2 के अनुसार नहीं है ओर न ही ठीक तरह से बनी हुई है ओर न ही असली बिल लगे हुए है ।
15.स्त्रीधन की सूची कानून से हिसाब से नहीं बनी है । ओर जो गिफ्ट लड़की को लड़के ओर उसके परिवार, रिश्तेदारो और दोस्तो से मिले है वो भी सूची में नहीं है। । जब लड़की ने घर छोड़ा था तब वो अपना सारा समान ले गयी थी जेसे की जेवर, कपड़े, महंगे समान आदि । कुछ सामान है जो की निमंलिखित है ओर में देने के लिए तयार हूँ ।
16.90 प्रतिशत शिकायत प्राथमिकी में बदल जाती है ।
17.2 या 3 तारीख के बाद आपको पता चल जाएगा की प्राथमिकी हो सकती है ।
18.जितनी जल्दी हो सके अग्रिम जमानत ओर आदेश जमानत आदि के लिए आवेदन कर दे ।
19.कभी भी झूठ न बोले या झूठा सबूत या झूठा गवाह न दे । हो सके तो सच पर कायम रहे । जो सच बोलते है भगवान उनके साथ होता है ।
20.लेकिन बोले वही जो बोलना चाहते है कुछ ओर न बोले । डर या तनाव की वजह से कुछ झूठ न बोले । अगर साथ में नहीं रहना तो नहीं रहना है ओर रहना है तो रहना है ।
21.जांच अधिकारी का फोन नंबर हमेशा साथ रखे ताकि वो आपको ओर आप उसको समय समय पर अपना विवरण बताते रहे । एक बात हमेशा याद रखे की कभी भी जाँच अधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश न करे। एक गलत कदम आपको मुसीबत में दाल सकता है ।
22.स्थानीय बैठक में आते रहे, लोगो से मिलते रहे, जानकारी लेते रहे, आदि ।
23.इस समय आप काफी तनाव में होते है इसलिए अपने आपको व्यस्त रखे जितना हो सके मजे करे सोचने से ओर रोने से कुछ नहीं होता ।
24.इस दौरान कभी भी मुकदमा न डाले । खासतोर से हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कोई भी मुकदमा न डाले ।
25.अगर कोई बच्चा या बच्चे है तो बोले मुझे उनसे मिलना है । 



Truth about False Rape Case.

बलात्कार के पीछे का सच: "झूठा बलात्कार" या "बलात्कार एक झूठ भी"

परस्तावना
आजकल मीडिया बलात्कार की खबरों से भरा पड़ा रहता है । भारत में बलात्कार यानि की महिला की मर्ज़ी के बिना के संभोग । लेकिन विश्लेषण करने पर पता चलता है की ज़्यादातर बलात्कार झूठे होते है । समान्यतः कोई भी पुरुष बिना किसी महिला की सहमति के सेक्स नहीं कर सकता। पर कभी कभी महिला अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए, पकड़े जाने पर, पकड़े जाने के डर, पैसो के लिए या संपति हथियाने के लिए सहमति के सेक्स को झूठे रेप केस बना देती है। बलात्कार कानून के हिसाब से महिला सच्ची, अबला और पवित्र मानी जाती है चाहे वो बिना शादी के सेक्स की वकालत करने वाली हो या खुलेआम जिस्म खरीदने बेचने वाली हों जबकि पुरुष को अत्याचारी और बलात्कारी माना जाता है । इस कानून के अनुसार पुरुष को अपनी बेगुनाही साबित करनी होती है । जबकि महिला का सिर्फ मोखिक कथन ही काफी है । महिला सुरक्षा कानून के अनुसार, आज़ादी कि जो परिभाषा बताई जा रही है उसका मतलब गलत सिद्ध होने लगा है । महिला को रातभर बाहर रहने की आज़ादी है शराब पीने की आजादी है कुछ भी करने की आजादी है । ऐसी ही आजादी का जिक्र दीपिका पादुकोण ने “My Choice” विडियो में किया था । कुछ लोग इसे बदली हुई संस्कृति तो कुछ फ़ैशन कहते है । ये आजादी और खुलापन एक दिन महिला की दिनचर्या बन जाती है । शादी के बाद यही महिला ससुराल को कैदखाना बताती हैं और अपने निजी स्वार्थ की वजह से ससुराल पक्ष के पुरुष पर बलात्कार का आरोप लगाने में जरा भी शर्म महसूस नहीं करती हैं । और इन सब की वजह से महिला अपनी आजादी अपना वजूद अपना सच आदि खत्म कर रही है । ये लेख आज़ादी के विरुद्ध नहीं है लेकिन बच्चे के हाथ में बंदूक देना आज़ादी नहीं गुनाह है ओर कुछ ऐसा ही बलात्कार कानून के साथ किया गया है ।

कुछ प्रमुख उदाहरण
दिमापुर नागालैंड में एक पुरुष को झूठे बलात्कार केस में सरेआम बेरहमी मार दिया गया ।
बड़ाऊँ उत्तर प्रदेश (दो बहनों) वाला केस झूठा निकला ।
मधुर भंडारकर और शायनी आहूजा आदि वाला केस झूठा निकला ।

बलात्कार का झूठा आरोप लगाने का प्रमुख कारण:
1. गर्भवती होने पर: इस महिला का मकसद अपनी पवित्रता सिद्ध करना होता है ।
2. पैसो के लिए: इस महिला का मकसद पैसा हड़पना होता है ।
3. बदला लेने के लिए: इस महिला का मकसद बर्बाद करना होता है चाहे वो कोई हो ।
4. जमीन जायदाद के लिए: इस महिला का मकसद जमीन जायदाद को हथियाना होता है।
5. अहंकार के लिए: इस महिला का मकसद अपनी बात को ऊपर रखना होता हैं ।
6. मानसिक समस्या: इस महिला का मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ होता है ।
7. वेवहिक समस्या: इस महिला का मकसद पति को बर्बाद या काबू करना होता है ।
8. नौकरी के लिए: इस महिला का मकसद बिना किसी योग्यता के नौकरी लेने से होता है ।
9. प्रमोशन के लिए: इस महिला का मकसद बिना किसी योग्यता के प्रमोशन लेने से होता है।
10. पत्नी बनने के लिए: इस महिला का मकसद पत्नी बनना होता हैं ।
11. जुर्म को छुपाने के लिए: इस महिला का मकसद जुर्म को छुपाना होता है ।
12. खून करने के लिए: इस महिला का मकसद खून करना होता है ।
13. परीक्षा में पास होने के लिए: इस महिला का मकसद पास होना होता है ।
14. चलती गाड़ी में बलात्कार: इस महिला का मकसद पैसा होता है ।
15. प्रेमिका की बात न मानो: इस महिला का मकसद मानसिक परेशान करना होता है ।
16. लिफ्ट में बलात्कार: इस महिला का मकसद पैसा होता है ।
17. आजकल तो कुछ लड़कियां अपने भाई और बाप पर तक बलात्कार का इल्ज़ाम लगने लगी है ।

बलात्कार के झूठे केस से पुरुष कैसे बच सकते है
1. उस महिला से संबंध न रखे जो शादीशुदा हो ।
2. उस महिला से संबंध न रखे जो पति से अलग रहती हो ।
3. उस महिला से संबंध न रखे जो तलाक़शुदा हो ।
4. उस महिला से संबंध न रखे जो किसी की प्रेमिका हो ।
5. उस महिला से संबंध न रखे जो अकेली रहती हो |
6. उस महिला से संबंध न रखे जो नाबालिग हो |
7. उस महिला से संबंध न रखे जो अपने परिवार के दवाब में हो |
8. उस महिला से संबंध न रखे जो उम्र में काफी छोटी हो या काफी तेज़ तर्रार हो |
9. उस महिला से संबंध न रखे जो आपसे उम्र में काफी बड़ी हो |
10. कभी भी अकेली महिला को कमरा किराए पर न दे और न ले |
11. कभी भी अकेली महिला को ट्यूशन न पढ़ाए और न ही उससे पढ़े |
12. कभी भी अकेली महिला को लिफ्ट न दे और न ले |
13. कभी भी अकेली महिला को नौकरी के लिए साक्षात्कार दे और न ले |

पुरुषों का दर्द और वेदना और उनके प्रति नकारात्मक मानसिकता
महिला की झूठी शिकायत पर पुरुष को बलात्कारी बना दिया जाता है । महिला सच बोलती है या झूठ कोई जांच नहीं की जाती । महिला का नाम व पहचान छुपाई जाती है व उसे सुरक्षा और हितकारी राशि मिलती है और उसके आरोप को सच माना जाता है । पुरुष को जेल हो जाती है उसे जमानत नहीं मिलती, उसका कैरियर खत्‍म हो जाता है, समाज में बेवजह बदनाम हो जाता है । रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी संबंध खतम करने लगते है। सारा समाज उस पुरुष से और उसके परिवार से नफरत करने लगता है। पुरुष का और उसके परिवार का मानसिक सामाजिक आर्थिक शारीरिक आदि रूप से बलात्कार हो जाता है। । हर महिला अपने बाप / भाई / बेटे को बलात्कारी नहीं मानती बाकी सब उसकी नज़र में बलात्कारी है। और अगर आरोप झूठा निकलता है तो भी महिला को कोई सजा नहीं होती । अगर ऐसे ही कानून बनते रहे तो पुरुष बलात्कार कानून के शिकार बनते रहेंगें । मीडिया को ऐसी खबरे बहुत भाती है वो बिना सोचे समझे उस खबर को दिखा देते है और ये भी नहीं सोचते की सच क्या है ।

नया बलात्कार कानून
16 दिसम्बर 2012 के बाद सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस जे एस वर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया जिनहोने एक नया बलात्कार कानून तैयार किया । इस विधेयक के जरिए भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम तथा यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम में संशोधन किए गए हैं। जिसे ‘आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2013’ के नाम से जाना जाता है । इस कानून में बलात्कार के अलावा एसिड अटैक, पीछा करने, घूर कर देखने को गैर जमानती अपराध घोषित किया गया है । मतलब ये की किसी भी महिला को बिना उसकी मर्जी के (घुरना या देखना या छूना या पकड़ना या छेड़ना या पीछा करना या दोस्ती का प्रस्ताव रखना या प्रेम करना या पीछा करना या शारीरिक संबंध बनाना) आदि । महिला से किसी भी प्रकार का अज्ञात संपर्क एक तरह से बलात्कार ही माना जाएगा। इस कानून के अनुसार अधिकतम सज़ा ज़िंदगी भर जैल या फांसी होगी और साथ ही जुर्माना भी होगा। महिला को पूरा अधिकार है की वो अपना मेडिकल न कराये नार्को न कराये और न पोलीग्राफ न कराये। कृपया इन धाराओ पर गौर करे: IPC 326A, 326B, 354, 354A, 354B, 354C, 354D, 370, 375, 376, 376A, 376B, 376C, 376D, 376E, 377, IEA 114A, POCSO, SHWP . पत्नी भी आईपीसी 498A ओआर घरेलू हिंसा कानून का दुरुपयोग करके पति पर बलात्कार और अप्रकार्तिक संभोग का केस लगा देती है ।

नए बलात्कार कानून का नुकसान:
महिला को सिर्फ कहना है कि किसी पुरुष ने उसका शारीरिक शोषण किया हैं चाहे झूठ हो या सच भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114अ के अनुसार उसके बयानों को ही पर्याप्त साक्ष्य माना जायेगा और इसके अनुसार कोई भी पुरुष गिरफ्तार किया जा सकता है और उसको जेल हो सकती है। इसी वजह से आजकल बलात्कार केस मे हर तरह के पुरुष फँस रहे है जैसे जज या नेता या नौकरशाह या डॉक्टर या पुलिस या फिल्मी हस्तियाँ या मालिक या शिक्षक या विध्यार्थी या दोस्त या जानकार या अपने ही रिश्तेदार या पति या प्रेमी आदि। ध्यान देने योग्य बात ये है की महिला को पूरा अधिकार है की वो अपना मेडिकल न कराये नार्को न कराये और पोलीग्राफ न कराये। इस कानून का नुकसान महिला को भी होता है क्योंकि कोई भी पुरुष इस कानून के डर से किसी भी महिला से कोई भी संबंध या मदद या सहायता करने से पहले एक लाख बार सोचेगा । और न ही कोई पुरुष किसी भी महिला पर भरोसा करेगा । और इन सब की वजह से महिला अपनी आजादी अपना वजूद अपना सच आदि खत्म कर रही है ।

एक नज़र वैवाहिक बलात्कार पर भी
भारत में विवाह एक संस्कार है न कि सेक्स करने का समझोता । वेसे भी वैवाहिक बलात्कार कानून मोजूद है डी वी एक्ट की धारा 3A में, IPC 498A और IPC 376A में । लेकिन कुछ नारीवादी इसको भी एक अलग कानून के रूप में लाना चाहती है । विवाह का मतलब है ज़िंदगी भर महिला और पुरुष के बीच में संभोग कानून और समाज के अनुसार सही है । विवाह सिर्फ महिला या पुरुष का नहीं होता है ये दो समाज दो परिवार का मिलन होता है । इसके अनुसार दो पक्ष के लोग जब राजी होते है तो विवाह होता है वो भी कानून के अनुसार । जिसमे महिला और पुरुष पक्ष के दोनों लोगो की रजामंदी होती है । लेकिन कुछ नारीवादी इस रिश्ते को तोडने पर लगी हुई है । इस बात का निर्धारण कौन और कैसे करेगा की एक साथ एक ही बिस्तर में सोने वाले पति-पत्नी के बीच सेक्स सहमती से हुआ है या असहमति से?

Rape of Childhood

मासूम नाबालिग लड़को का उत्पीड़न

अभी कुछ दिनो पहले एक खबर आई थी की एक 38 साल की महिला शिक्षक कोयौन शोषण / बलात्कार के लिए गिरफ्तार किया गया है । खबर के अनुसारउसने अपने बेटे के दोस्त के साथ तीन महिने तक यौन शोषण / बलात्कार किया ओर जब लड़के ने इसकी शिकायत की तो उस महिला के अनुसार वो दोनों पति पत्नी है । यानि की कानून की नजरों में एक महिला ने एक मासुम नाबालिग लड़के यौन शोषण / बलात्कार का किया ।

कितनी अजीब बात है की हमारे देश में यौन शोषण / बलात्कार सिर्फ लड़की का माना जाता है, मासुम नाबालिग लड़के का नहीं। यहाँ तक की हमारा कानुन भी यही मानता है कि यौन शोषण / बलात्कार सिर्फ लड़की का हो सकता है मासुम नाबालिग लड़के का नहीं । जबकि देखा जाए तो मासुम नाबालिग लड़को का भी यौन शोषण / बलात्कार होता है महिला द्वारा भी पुरुष द्वारा भी । आईपीसी 377 इस बात की व्याख्या करता है की मासुम नाबालिग लड़को का भी रेप होता है । और बच्चों का संरक्षण, लैंगिक अपराध अधिनियम 2012 (POSCO)कानून के अनुसार भी मासुम नाबालिग लड़के का भी यौन शोषण / बलात्कार तिरस्कार होता है । काफी बार मासुम नाबालिग लड़के के साथ यौन शोषण / बलात्कार की खबरे आती है लेकिन न तो सरकार ओर न ही मीडिया इस बात को तूल देती है । लेकिन अगर नाबालिग लड़की का यौन शोषण / बलात्कार हो जाए तो सरकार ओर मीडिया ओर तंत्र सब हिल जाता है उस लड़की को मेडिकल सहायता दी जाती है उसे मुआवजा दिया जाता है उसका चेहरा छुपा कर साक्षात्कार किया जाता है जबकि मासुम नाबालिग लड़के के मामले में ऐसा कुछ नहीं होता । इसका सबसे बड़ा कारण है की ज़्यादातर लोग सोचते है कि यौन शोषण / बलात्कार सिर्फ लड़की का ही हो सकता है । और हमे यही सोच तो बदलनी है ।

यूनिसेफ़ के अनुसार मासूम नाबालिग बच्चो के साथ हिंसा का निम्न प्रारूप हो सकता है: शारीरिक और मानसिक शोषण और चोट, उपेक्षा या लापरवाही उपचार, शोषण और यौन शोषण । हिंसा कही भी हो सकती है जैसे की घर, स्कूल, अनाथलयों, सड़कों, कार्यस्थल, जेल, हिरासत में लिए जाने के स्थानों में ।इस तरह की हिंसा उनके मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर सकते हैं । चरम मामलों में हो सकती है।

भारत सरकार की रिपोर्ट Study on Child Abuse: India 2007” के अनुसार 52.94% मासुम नाबालिग लड़के यौन शोषण / बलात्कार किए गए जबकि 47.06% लड़कियों का यौन शोषण / बलात्कार हुआ जो कि पेज न: 49 ओर 74 पर दिया गया है । उसी रिपोर्ट के पेज न: 75 के अनुसार राज्यो का आंकड़ा दिया गया है जिसमे ज्यादातर राज्यो में मासुम नाबालिग लड़को का यौन शोषण / बलात्कार किया गया है ।

आजकल कुछ फिल्म निर्माता ओर टीवी वाले भी मासुम नाबालिग लड़को के उपर हुए अत्याचार को दिखा रहे है:
· पेज 3 2005 में दिखाया गया है कि विदेशी ग्राहक को खुश करने के लिए मासूम नाबालिग लड़को को यौन शोषण / बलात्कार के लिए परोसा जाता है ।
· बीए पास 2012 में दिखाया गया है कि कैसे बड़े ओर अमीर घर की महिला पुरुष का यौन शोषण / बलात्कार करती है ।
· स्लमडॉग मिलियनेयर 2008में दिखाया गया है कैसे मासुम नाबालिग लड़को को भिखारी बनाया जाता है ओर दलाल भी ।
· “अंधा युद्ध 1987 में दिखाया गया है कि कैसे एक शिक्षक एक मासुम नाबालिग छात्र का यौन शोषण / बलात्कार करता है ।

मासुम नाबालिग लड़को पर उत्पीड़न के प्रकार
· भिखारी बनाना ।
· मजदूर बनाना ।
· नौकर बनाना ।
· गुलाम बनाना ।
· यौन शोषण / बलात्कार करना ।
· कम उम्र में बड़ी उम्र कि लड़की से शादी ।
· ढाबो पर बर्तन धोते हुए
· भट्टो पर ईट बनते हुए

नकरात्मक लोग क्या सोचते है:
· कम उम्र का है बहस नहीं करेगा ।
· कम मजदूरी देनी पड़ेगी ।
· कितना मारो पीटो कही नहीं जाएगा ।
· पीटता रहेगा लेकिन कोई शिकायत नहीं करेगा ।
· मालकिन सोचती है की यौन शोषण / बलात्कार करूंगी तो किसी को बतायगा नहीं डर से चुप रहेगा या पैसो की ताकत से चुप रहेगा ।

उम्मीद कि किरण
आजकल कुछ सरकारी ओर गैर सरकारी संस्थाएं जैसे की एसआईएफ़ इस दिशा में काम कर रही है जिससे कि मासुम नाबालिग लड़को को भी न्याय मिल सके । वो भी सम्मान कि जिंदगी जी सके । अपना कैरियर बना सके । ओर जिस तरह एक लड़की को मासूमियत से देखा जाता है तो उसी तरह मासूमियत से एक नाबालिग लड़के को देखा जाए ।

समाचार पत्रो की खबरे
अमर उजाला की 8 अक्तूबर 2015 के अनुसार बागपत में एक शिक्षक ने कक्षा 2 के छात्र के साथ कुकर्म किया ।
अमर उजाला की 17 सितम्बर 2015 के अनुसार मुंबई में एक मदरसे में 5 साल के छात्र के साथ कुकर्म किया ।

इसको कैसे ढ़ीक किया जाए ओर क्या क्या जाए
सरकार को इस विषय पर गंभीरता से सोचना होगा की ऐसा क्यों हो रहा है कैसे इसे रोका जाए। एक तरीका तो है की उत्पीड़न के बाद जिस तरह लड़की को देखा जाता है उसी तरह लड़के को भी देखा जाए। उसके साथ भी वही व्यवहार किया जाए तो लड़की के साथ किया जाता है। एनजीओ की मदद लेनी चाहिए । स्कूल ओर कॉलेज में इस विषय पर बातचीत होनी चाहिए । सरकार को लोगो के साथ मिलकर कदम उठने होंगे।

कुछ नज़र इधर भी

First Time in Save Indian Family Movement





1. सबसे पहले एक अलग ईमेल आईडी बनाए, अलग मोबाइल नंबर ले, अलग फेस्बूक आईडी बनाए और अलग टिवीटर आईडी बनाए ।
2. सेव इंडियन फ़ैमिली का याहू ग्रुप, गूगल ग्रुप, फेस्बूक ग्रुप, टिवीटर ग्रुप, व्हात्सुप ग्रुप, आदि जॉइन करे ।
3. जितना हो सके लोकल मीटिंग में जाए चाहे वो किसी भी ज़िला या राज्य में हो ।
4. हमेशा दो मोबाइल नंबर रखे एक व्यतिगत ओर एक सेव इंडियन फ़ैमिली के लिए ।
5. हमेशा अपनी व्यतिगत जानकारी साझा करे आदि ।
6. हमेशा 4-5 मेम्बर्स के संपर्क में रहो।
7. कभी भी किसी को बिना मांगे ओर गलत कानूनी सलाह मत दो ।
8. लेकिन उसको सामाजिक, पारिवारिक आदि सलाह दे सकते हो ।
9. हमेशा नए लोगो को 8882498498 नंबर ही दो ।
10. सेव इंडियन फ़ैमिली में कोई भी परिपूर्ण नहीं है लेकिन करीब जरूर है ।
11. सलाहे कितनी भी और किसी से भी लो लेकिन उनमे से कोई एक चुनो जोकि तुम्हारे स्थिति पर फिट होती हो ।
12. कानून की नगरी में एक बात हमेशा याद रखो: कुछ भी हो सकता है ओर कुछ भी नहीं होगा ।
13. विचारो से नफरत करो नाकि जात, धर्म, पोस्ट आदि से ।
14. कभी भी झूठ मत बोलो और लिखो क्योंकि भगवान सब देखता है ।
15. हमेशा अपनी संस्था ओर उसके लोगो की इज्ज़त करो ओर ईमानदारी बनाए रखो ।
16. कभी भी अपनी नौकरी मत छोड़ो क्योंकि कोई भी वकील तुम्हारा केस फ्री में नहीं लड़ेगा ।
17. जायदाद से बेदखली कुछ नहीं सिर्फ आँख धोना है ।
18. कभी भी पुलिस स्टेशन ओर कोर्ट आदि की तारीख मिस मत करो ।
19. वकील पर कभी अंधा भरोसा मत करो ।
20. वकील से कभी भी मूल दस्तावेज़ साझा मत करो ।
21. कभी भी भावनात्मक, परेशान और अहंकारी आदि मत बनो, न रहो और न दिखो ।
22. हमेशा अपना आत्मविश्वास अपने साथ रखो ।
23. कानूनी लड़ाई से सिर्फ खेलो ओर भी जितने के लिए ।
24. कभी भी किसी को रिश्वत मत दो ।
25. हमेशा अपने परिवार ओर दोस्त आदि को इज्ज़त ओर प्यार दो क्योंकि मुसीबत में ये तुम्हारी ताकत होती है ।
26. हमेशा एक अच्छा दोस्त अपने साथ रखो चाहे वो किसी भी लिंग, जाति औरधर्म आदि का हो ।
27. कभी भी अपने आपको जज मत करो ।
28. हमेशा अपनी गलतियों को स्वीकारो ।
29. कभी भी बिना किसी कारण के किसी को गलत मत बोलो ।
30. हमेशा अपनी स्थिति के अनुसार किताबे पढ़ो ।
31. हमेशा लड़ाई तरीके से लड़ो जेसे की कानूनी लड़ाई कानूनी तरीके से, सामाजिक लड़ाई सामाजिक तरीके से, भावनात्मक लड़ाई भावनात्मक तरीके से, आदि ।
32. दुश्मन की गलतियों पर मुस्कराओ मत, बल्कि अपनी जीत पर हंसो ।
33. किसी पर अगर हसना है तो दिल से हंसो न की चेहरे से ।
34. कभी भी छोटे बड़े में भेदभाव मत रखो । बल्कि उनकी अच्छाइयों को अपनाओ ।
35. फ़ेल का मतलब ये नहीं की तुम गलत थे या गलत हो , इसका मतलब परिस्थिति तुम्हारे साथ नहीं थी या तुम्हारा वकील तुम्हारे साथ नहीं था या जज की सोच नकारात्मक थी या तुम्हारी किस्मत तुम्हारे साथ नहीं थी ।
36. कभी भी अपने केस ओर स्थिति आदि को किसी के साथ तोलो मत क्योंकि हर इंसान अलग है ओर हर केस अलग है ।
37. विरोधी पार्टी को हराने के लिए तुम्हारी एक मुस्कान, सोमय स्वभाव और आत्मसंतुष्टि ही काफी है ।
38. कभी भी अपने आपको दोषी मत मानो अगर तुमने कुछ गलत नहीं किया है तो ।
39. इंसान एक वक़्त में दो लड़ाई लड़ता है एक दिल से ओर एक दिमाग से, कोशिशकरो की दिल की लड़ाई से जीत सको क्योंकि दिमाग की लड़ाई तो टेंशन देती है ।
40. जो होना है वो होके रहेगा लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम कुछ करे ही नहीं बल्कि हमे जितना हो सके उतना अच्छा करना चाहिए ।