Sunday, 28 January 2018

Domestic violence on Husband. पति पर घरेलू हिंसा


How does a Husband tolerates Domestic Violence by Wife?


How does a Husband tolerates Domestic Violence by Wife?

पति या पुरुष पर घरेलू हिंसा

प्रस्तावना
अक्सर हम हमेशा से सुनते आये हैं कि घरेलु हिंसा सिर्फ महिला ही सहती है लेकिन क्या कभी हमने सुना है की एक पुरुष भी घरेलु हिंसा का शिकार होता है । ये कहना सच है पुरुष महिला के मुक़ाबले शारीरिक रूप से मजबूत होता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं की वो घरेलु हिंसा न सहता हो । और ये वो हिंसा होती है जिसे चाहकर भी कोई पुरुष किसी को बता नहीं सकता या बताना नहीं चाहता । क्योंकि समाज मानने को तैयार नहीं और कानून का भी इस मामले में कोई सहारा नहीं है । आज के दौर में अगर एक महिला चाहे तो अपने पति या पुरुष  को घरेलू हिंसा कानून के सहारे जेल भिजवा सकती है । लेकिन ये हक़ किसी पति या पुरुष को नहीं है ।

घरेलू हिंसा झेलने वाले पुरुष
इस श्रेणी में सबसे पहला स्थान पति का होता है उसके बाद ससुर फिर जेठ फिर देवर और फिर कोई भी पुरुष जो की पति से ताल्लुक रखता है । जरूरी नहीं की पुरुष शादी शुदा हो अगर वो लिव इन में रह रहा है तो भी वो किसी न किसी रूप से घरेलू हिंसा का शिकार होता है ।

समाज क्या कहता है
समाज ये मानने को तैयार नहीं की पति या पुरुष भी कभी घरेलू हिंसा का शिकार हो सकता है । अगर कभी कोई पति या पुरुष ये बताने की कोशिश भी करेगा तो उसका मज़ाक उड़ाया जाएगा और उस पर व्यंग मारा जाएगा की एक औरत से पिट गया । थू है तेरी मर्दानगी पर । इसी कारण पति या पुरुष अपने हुए अत्याचार को किसी से कहता नहीं ओर अंदर ही अंदर घुलता रहता है और धीरे धीरे बीमारी का घर बनता चला जाता है । और आखिर में एक दिन उसकी ज़िंदगी भी समाप्त हो जाती है ।  समाज में माना जाता है कि एक पति या पुरुष कभी भी महिला के जुल्मों का शिकार नहीं हो सकता है. उसे कई वैधानिक,सामाजिक कानूनों या आर्थिक मदद से सिर्फ इसलिए वंचित किया जाता है क्योंकि वह पुरुष है. आजकल तो समाचार पत्र, टीवी, सिनेमा आदि औरत को बहुत ताकतवर दिखाया जा रहा है. घर ही नहींकार्यक्षेत्र में भी उस का दबदबा होता है.

घरेलु हिंसा के प्रकार
कोई भी महिला खासतोर से पत्नी अपने पति या पुरुष  का काफी तरीको से घरेलु उत्पीड़न करती है । जैसे कि मानसिक पीड़ा देना, पारिवारिक सदस्य से न मिलने देना, दोस्त और रिश्तेदार ओर आस पड़ोस से न मिलने देना, आत्‍महत्‍या करने की धमकी देना, नामर्द पुकारना, घर से निकलने को विवश करना, बात बात पर टोकना,  थप्‍पड़ मारना, शारिरिक हिंसा, मारपीट करना, ठोकर मारना,दांत से काटना, लात मारना, मुक्‍का मारना, धकेलना, किसी अन्‍य रीति से शारीरिक पीड़ा या क्षति पहुँचाना, दुर्व्‍यवहार करनेअपमानित करने, नीचादिखाने, प्रतिष्‍ठा का उल्‍लंघन, मौखिक और भावनान्‍तम हिंसा, अपमान, गालियॉं देना, चरित्र और आचरण पर दोषारोपण, पूरी सैलरी रख लेना, संभोग न करना,खाने में थूक देना, पति या पुरुष  कि बिना मर्जी से संभोग करना, महिला का बात बात पर आत्महत्या की धमकी देना, बेइज्‍जत करनाताने देनागाली-गलौच करनाझूठा आरोप लगानामूलभूत आवश्‍यकताओं को पूरा न करना, मायके से न बुलाना,, शारीरिक प्रताड़नातलाक एवं मूलभूत आवश्‍यकताओं को पूरा न करने की धमकी देना, चांटा मारनाधक्‍का देना, छीना झपटी करना,   लकड़ी या हल्‍की वस्‍तु से पीटनालात मारनाघूंसा मारनामाचिस या सिगरेट से जलाना,गंभीर रूप से पीटना, जिससे हड़डी टूटना या खिसकना जैसी घटनाएं शामिल है,गंभीर रूप से जलानालोहे की छड़धारदार वस्‍तु या भारी वस्‍तु से वार करना। कभी कभी पति या पुरुष ये सब सह नहीं पता और आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाता है ।

घरेलू हिंसा के कारण
अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ज्यादा सुन्दर है मतलब की अगर पति या पुरुष  काला है तो उसको रंग भेद की टिप्पणी सहनी पड़ती है । अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ज्यादा पढी लिखी है मतलब की पति या पुरुष अगर कम पढ़ा लिखा है तो उसको अनपढ़ और गंवार आदि की टिप्पणी सहनी पड़ती है । अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ज्यादा कमाती है तो उसको कम कमाने का ताना झेलना पड़ता है । अगर कोई महिला पति या पुरुष  से ऊंचे पद पर कार्य करती है तो उसको इस बात का भी ताना झेलना पड़ता है । कभी कभी महिला पति या पुरुष  के परिवार के साथ रहना नहीं चाहती और पति या पुरुष अपने परिवार को छोड़ना नहीं चाहता ये भी एक कारण होता है । कभी कभी महिला पति या पुरुष  पर मालिकाना हक़ चाहती है और पति या पुरुष  पर सम्पूर्ण अधिकार चाहती है । किसी किसी परिवार में महिला के मायके का दखल भी घरेलू हिंसा को बड़ावा देता है । किसी किसी महिला के शादी से पहले के अतिरिक्त विवाहेतर संबंध शादी के बाद भी चल रहे होते है या दफ्तर में किसी साथी के साथ प्रेम प्रसंग भी घरेलू हिंसा को बड़ावा देता है । महिला का बहुत ज्यादा शक्की होना । महिला का बहुत ज्यादा ज़िद्दी होना । महिला का बहुत ज्यादा खर्चीला होना । महिला की पेसो की भूख समाप्त न होना । महिला का बात बात पर झूठ बोलना ।

कानुन क्या कहता है ।
कानून  के अनुसार घरेलू हिंसा सिर्फ एक महिला पर हो सकती है । किसी पति या पुरुष  पर नहीं । हालांकि एक नाबालिग पुरुष घरेलू हिंसा का शिकार हो सकता है लेकिन अगर वो नाबालिग होते हुए शादी शुदा है तो वो कभी भी घरेलु हिंसा का शिकार नहीं हो सकता । पशुओं तक को हमारे समाज में सुरक्षा मिलती है लेकिन पति या पुरुष की सुरक्षा के लिए कोई कानून नहीं है. हक़ीक़त तो यह भी है कि जब हम पति या पुरुष पर अत्याचार के खिलाफ धरने या प्रदर्शन आदि करते हैं तो बहुत सारे पति या पुरुष उस में शामिल नहीं होते हैं । या तो शर्म महसूस करते हैं या अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के विरोध में आवाज उठाने से कतराते हैं कि समाज क्या कहेगा । पुरुषों पर होने वाले अत्याचार तब तक नहीं रोके जा सकते जब तक वे खुद अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाते । लेकिन ये सोच धीरे धीरे बादल रही है और अब लोग खुलकर पति या पुरुष पर घरेलु हिंसा के उपर बोल रहे है लिख रहे है ।

घरेलू हिंसा का नुकसान
सुबह मानसिक तनाव में उठता हैनाश्ता होता नहींलंच मिलता नहींसारा दिनमानसिक तनाव में रहता हैदफ्तर में अधिकारियों से डांट खाता हैफिर भी काम करता हैसब कुछ सहता हैरात को देर से घर पहुंचता है ओर देखता है बीवी सो चुकी हैडिनर बना नहीं होतातब वह सिगरेट ओर शराब में गिरता चला जाता है,ओर हद तो तब होती है जब वो अपनी मर्जी से लड़के का शारीरिक शोषण(बलात्कार) यानि की लड़के की मर्जी के बिना संभोग करती है ओर कहती है ये तो तुझे करना पड़ेगा आये दिन न जाने कितने पति या पुरुष अपने ऊपर होने वाले शारीरिकमानसिक और आर्थिक स्थिति सहते हुए या तो जीने को मजबूर है या मौत को गले लगा लेते हैं  । 

पति या पुरुष क्या कर सकता है
पति या पुरुष अपने उपर हुए हिंसा के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज़ करा सकते है । अगर पुलिस उनकी शिकायत  दर्ज नहीं करतीतो पति या पुरुष सीधे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है।
निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अब इस बात को महसूस कर रहे हैं कि महिलाएं भी पति या पुरुष के उपर घरेलू हिंसा के झूठे मुकदमे कर रही हैं। इसी का परिणाम है कि कई ऐसे मामले सामने आए हैंजिनमें अदालतों ने झूठी शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए ऐसी महिलाओं को सजा दी है।


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Sorry to say Please
Sattu Jatav
9953935838

Sunday, 28 May 2017

How to Celebrate Father's Day on 18 June 2017


How to Celebrate Father's Day on 18 June 2017

पितृ दिवस / पिता दिवस / फ़ादर्स डे /Father’s Dayआदि


पितृ दिवस क्यों मनाया जाता है:
पितृ दिवस की शुरुआत बीसवीं सदी के प्रारंभ में पिता धर्म तथा पुरुषों द्वारा परवरिश का सम्मान करने के लिये रूप में हुई यह हमारे पूर्वजों की स्मृति और उनके सम्मान में भी मनाया जाता है पितृ दिवस को विश्व में विभिन तारीखों पर मनाते है जिसमे उपहार देना, पिता के लिये विशेष भोज, पारिवारिक गतिविधियाँ आदि शामिल हैं पहला पितृ दिवस 19 जून 1910 को सोनोरा स्मार्ड डोड ने शुरू किया था उन्होने अपने पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट की याद में पादरी से अपील की थी कि पिता के लिए भी एक दिन होना चाहिए. पहले वह पितृ दिवस अपने पिता के जन्मदिन वाले दिन यानि की पांच जून को मनाना चाहती थीं लेकिन पादरी के पास समय नहीं था फिर इसे 19 जून 1910 को मनाया गया, और संयोग से उस दिन जून का तीसरा रविवार था. पितृ दिवस पिता के सम्मान में मनाया जाने वाला पर्व है जिसमें पितृत्व, पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। भारत में यह जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है इस बार यह 19 जून 2016 को मनाया जाएगा वैसे तो पितृ दिवस दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग दिन और विभिन्न परंपराओं के कारण से मनाया जाता है लेकिन विश्व के अधिकतर देशों में इसे जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है हिन्दू परंपरा के मुताबिक पितृ दिवस भाद्रपद महीने की सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है सुबह उठते ही अपने पिता को इस दिन की बधाई देनी चाहिए और हो सके तो कुछ उपहार आदि भी देना चाहिए

मेरा अनुभव
अभी कुछ दिन पहले मुझे एक पिता मिला जिसके बेटे पर उसकी पत्नी (बेटे की पत्नी) ने दहेज के झूठे केस किए हुए थे और वो बड़ा परेशान था एक पिता से और मिला जिसके बेटे पर उसकी महिला मित्र (बेटे की महिला मित्र) ने बलात्कार का झूठा केस किया हुआ था और वो जेल में बंद था एक पिता से और मिला जिसे ये तो पता था की वो पिता है लेकिन ये नहीं पता था की वो लड़की का पिता है या लड़के का पिता है क्योंकि उसकी पत्नी ने उसे कभी बताया ही नहीं पारिवारिक मुकदमे की वजह से मुझे उन सब पिताओं का दर्द दिखाई भी दे रहा था और महसूस भी हो रहा था और मैं सोचने पर मजबूर था की एक पिता अपने बच्चे के लिए क्या कर सकता है और एक बच्चा अपने पिता के लिए क्या कर सकता है इसमे कोई शक नहीं की जब जब बच्चो पर परेशानी आती है तो सबसे पहले परेशान पिता ही होता है । और वो हर संभव कोशिश करता है अपने बच्चो को परेशानी से निकालने के लिए । फिर मैंने उन सब पिताओं और उनके बेटो को पितृ दिवस के बारे में बताया और कहा कम से कम हम इस दिन को अपने पिता के लिए समर्पित कर सकते है और अपने तरीके से मना सकते है

पिता कौन है
पिता एक ऐसा व्यक्तितिव है जिसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती यह एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जिसकी तुलना किसी भी रिश्ते से नहीं की जा सकती बचपन में जब कोई बच्चा चलना सीखता है तो सबसे पहले अपने पिता की उंगली थामता है नन्हा सा बच्चा पिता की उँगली थामे और उसकी बाँहों में रहकर बहुत सुकून पाता है बोलने के साथ ही बच्चा जिद करना शुरू कर देता है और पिता उसकी सभी जिदों को पूरा करता है बचपन से लेकर जवानी तक जब तक पिता जिंदा रहता है बच्चे की हर मांग को पूरी करने का प्रयास करता है जैसे की चॉकलेट, खिलौने, बाइक, कार, लैपटॉप आदि उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने तक सभी माँगों को वो पूरा करता है लेकिन कभी-कभी एक समय ऐसा भी आता है जब भागदौड भरी इस ज़िंदगी में बच्चों के पास अपने पिता के लिए समय नहीं होता है भारतीय समाज में माता, पिता, गुरु आदि को भगवान माना जाता है हमारे ग्रन्थों में भी ऐसा ही लिखा है इसमे कोई शक नहीं की हमारा असली भगवान हमारा पिता ही होता है जिसके कारण हम इस दुनिया में आए है पिता जिंदगी भर हमारे लिए कमाता है तो हमे भी चाहिए की हम भी उनके सम्मान में कुछ करे जैसे की श्रवण कुमार ने किया था संतान को पिता के प्रति हमेशा श्रद्धा और विनम्रता का भाव होना चाहिए  चाहें कोई भी देश हो, संस्कृति हो पिता का रिश्ता सबसे बड़ा माना गया है भारत में तो इन्हें ईश्वर का रूप माना गया है यदि हम हिन्दी कविता जगत की कवितायें देखें तो पिता के उपर काफी कुछ लिखा है पिता, पापा, अब्बा, बाबा, बाबूजी, बाऊजी, डैडी, आदि कितने ही नाम हैं इस रिश्ते के, पर भाव एक, प्यार एक, समर्पण एक है

भारत में पितृ दिवस कैसे मनाया जाता है
पितृ दिवस के लिए भारत में छुट्टी नहीं मिलती है पिछले कुछ समय से कुछ कंपनी पितृ दिवस के मोके पर ग्रीटिंग कार्ड, गिफ्ट्स आदि को मार्केट में बेच रही है कोई शक नहीं की वो मुनाफा चाहती है लेकिन कही कही उनके द्वारा पितृ दिवस को बढ़ावा भी मिल रहा है कुछ बड़े शहरों में इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है कुछ स्कूलों में पितृ दिवस को मनाया जाता है और इस दिवस से संभन्धित उपहार तैयार किये जाते हैं एक पिता हर बच्चे के लिए पहला आदर्श व्यक्ति होता है इसलिए एक बच्चे के लिए एक पिता की छवि शुरू से ही बहुत सम्मानीय होती है पिता दिवस जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है यह एक संघीय अवकाश नहीं है पिता दिवस से मेरा तात्पर्य है कि जिसने पिता बनकर हमारे जीवन को प्रभावित किया है, जिसने हमे पहचान दी है , जिसने हमे नाम दिया है, उसको सम्मानित्त करने के लिए है यह कार्ड, उपहार आदि के माध्यम से मनाया जाता है घर पर या बाहर लंच पर या डिनर पर भी मनाया जाता है इस दिन पित्रत्व और पिता परिवार की पहचान भी होती है बहुत सारे देशो में यह तीसरे रविवार को जून में मनाया जाता है लेकिन कुछ देशो में यह किसी और तारीख को भी मनाया जाता है

एक छोटी सी कविता पिता के सम्मान में

पिता ने हमको योग्य बनाया, कमा कमा कर अन्न खिलाया
पढ़ा लिखा गुणवान बनाया, जीवन पथ पर चलना सिखाया
जोड़ जोड़ अपनी सम्पत्ति का बना दिया हक़दार...
हम पर किया बड़ा उपकार....दंडवत बारम्बार...


वैसे तो आज मेरे पिताजी इस दुनिया में नहीं है और मेरा बेटा भी इस दुनिया में नहीं है लेकिन फिर भी उनकी याद में, मैं पित्र दिवस को अपने तरीके से मनाऊँगा । एक बेटा होने के नाते पिता के लिए और एक पिता होने के नाते बेटे के लिए मैं पूजा करूंगा और उन्हे श्रद्धांजलि दूंगा ।

Sorry to say Please
Sattu Jatav
9953935838